Bihar News: "शर्मिंदगी है, फिर सरकार में क्यों हैं?" चिराग के बयान ने NDA को घेरे में खड़ा किया



पटना
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बिहार में कानून-व्यवस्था पर अब तक विपक्ष सवाल उठा रहा था। इस बार सवाल सत्ता के भीतर से उठा है, और वह भी उस नेता की ज़ुबान से जो खुद सरकार का साझीदार है। केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने कहा है कि उन्हें ऐसी सरकार का हिस्सा होने पर शर्मिंदगी महसूस होती है, जहां महिलाओं और नाबालिगों के साथ ऐसी घटनाएं हो रही हैं।

"कोई सुरक्षित नहीं"

27 सितंबर को दिए इंटरव्यू में चिराग ने कहा कि राज्य में आज कोई भी व्यक्ति खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा। उन्होंने साफ किया कि उनकी पार्टी सरकार की सहयोगी है, इसलिए वे कानून-व्यवस्था के सवालों से खुद को अलग नहीं कर सकते। उनके मुताबिक इन घटनाओं को हल्के में नहीं लिया जा सकता, और इनका असर सिर्फ राज्य की क़ानून-व्यवस्था पर नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर बिहार की छवि पर भी पड़ता है।

यह किसी विपक्षी नेता का आरोप नहीं है। यह सत्ता में बैठे साझीदार की स्वीकारोक्ति है, जिसे टालना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।

जमुई से शुरू हुई आग

बहस तब और तेज़ हुई जब जमुई से एक कथित आपत्तिजनक वीडियो सामने आया। पुलिस कार्रवाई हुई और आरोपियों की गिरफ्तारी की खबर आई। लेकिन सवाल गिरफ्तारी के बाद खत्म नहीं हुए, क्योंकि उसके बाद समस्तीपुर, बांका और दूसरे जिलों से भी ऐसी घटनाएं सामने आईं। एक-दो घटनाएं अपवाद हो सकती हैं। जब हर कुछ दिन में नया जिला सुर्खियों में आए, तो सवाल व्यवस्था पर उठता है।

बयान के पीछे का दबाव

इंटरव्यू में चिराग से पूछा गया कि क्या वे कोई बड़ा राजनीतिक फैसला लेंगे। उन्होंने किसी फैसले की घोषणा नहीं की। यही बयान का सबसे दिलचस्प पहलू है। नाराज़गी खुलकर है, पर उसका नतीजा अभी कुछ नहीं। शर्मिंदगी का इज़हार है, पर सत्ता छोड़ने का कोई संकेत नहीं।

विपक्ष ने यही कमज़ोर नस पकड़ी। रोहिणी आचार्य ने कहा कि अगर चिराग को सरकार का हिस्सा होने पर शर्मिंदगी है, तो उन्हें सरकार से अलग होने का फैसला लेना चाहिए। सवाल सीधा है और जवाब अब तक नहीं आया।

असली सवाल किससे?

चिराग का बयान अपने आप में एक सवाल है, जो अब सरकार के सामने खड़ा है: क्या इन घटनाओं के बाद महिला सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था को लेकर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा, या बात बयानों और गिरफ्तारी की खबरों पर ही रुक जाएगी?

अपराध के आंकड़ों और घटनाओं की असली तस्वीर आधिकारिक आंकड़ों और अलग-अलग स्रोतों से परखी जानी चाहिए। लेकिन एक बात अब साफ है। महिला सुरक्षा का सवाल विपक्ष का चुनावी मुद्दा भर नहीं रहा। जब सत्ता का साझीदार खुद शर्मिंदगी की बात करे, तो सरकार के पास "विपक्ष राजनीति कर रहा है" वाला जवाब भी कमज़ोर पड़ जाता है।

अब देखना यह है कि चिराग की शर्मिंदगी बयान तक सीमित रहती है या किसी फैसले में बदलती है, और सरकार जवाब सिर्फ़ सफाई में देती है या कार्रवाई में।

 

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