मेजर ऋषभ सिंह संब्याल: राष्ट्रपति भवन से विदाई तक की अनकही कहानी

मेजर ऋषभ सिंह संब्याल: स्कूल की वर्दी से राष्ट्रपति भवन तक, 12 साल की वह कहानी जो सिर्फ वायरल तस्वीरों की नहीं थी


राष्ट्रपति भवन में कैमरे बहुत कुछ रिकॉर्ड करते हैं, लेकिन सब कुछ नहीं बताते।

कैमरा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ खड़े एक सैन्य अधिकारी को देखता था। इंटरनेट ने उस चेहरे को पहचान लिया। किसी ने उन्हें ‘नेशनल क्रश’ कहा, किसी ने उनकी वर्दी और personality की तारीफ की। तस्वीरें वायरल हुईं, reels बनीं और कुछ ही समय में मेजर ऋषभ सिंह संब्याल एक ऐसे सैन्य अधिकारी बन गए, जिन्हें देश का एक बड़ा हिस्सा उनके काम से ज्यादा उनकी तस्वीरों के जरिए पहचानने लगा।

लेकिन तस्वीर के फ्रेम के बाहर एक दूसरी कहानी थी।

वह कहानी एक ऐसे बच्चे की थी जिसने सैनिक स्कूल से शुरुआत की, NDA और IMA की कठोर ट्रेनिंग से गुजरा, भारतीय सेना की जिम्मेदारियां संभालीं, 4 PARA Special Forces तक पहुंचे और फिर राष्ट्रपति भवन में देश की प्रथम नागरिक के ADC बने।

और फिर, जब उम्र सिर्फ करीब 30 वर्ष थी और सैन्य करियर अभी लंबा हो सकता था, उन्होंने सेना से समय से पहले विदाई लेने का फैसला कर लिया।

यह कहानी उस मुस्कान से कहीं बड़ी है, जो राष्ट्रपति भवन की तस्वीरों में दिखाई देती है।

कहानी की शुरुआत राष्ट्रपति भवन से नहीं, सैनिक स्कूल से हुई

मेजर ऋषभ सिंह संब्याल की सैन्य यात्रा की पहली सीढ़ी Sainik School Kapurthala, Punjab थी।

सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियां यह बताती हैं कि उन्होंने सैनिक स्कूल से शिक्षा ली और वहीं से सैन्य जीवन की दिशा में उनकी रुचि मजबूत हुई। हालांकि उनके स्कूल में प्रवेश की सटीक तारीख सार्वजनिक विश्वसनीय स्रोतों में उपलब्ध नहीं है, इसलिए इस तारीख को लेकर अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

लेकिन एक बात साफ है राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने की कहानी अचानक शुरू नहीं हुई थी।

उसकी नींव बचपन की उस दुनिया में रखी गई थी जहां सुबह की परेड, अनुशासन और वर्दी सिर्फ स्कूल की दिनचर्या नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा होते हैं।

2013: NDA की ओर पहला बड़ा कदम

सैनिक स्कूल के बाद अगला बड़ा पड़ाव था National Defence Academy यानी NDA।

उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक संब्याल ने 2013 में NDA qualify किया। इसके बाद उन्होंने NDA की तीन वर्ष की कठिन सैन्य और अकादमिक ट्रेनिंग पूरी की और फिर Indian Military Academy यानी IMA की ओर बढ़े।

NDA सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं है।

यह वह जगह है जहां एक युवा को धीरे-धीरे यह सिखाया जाता है कि नेतृत्व का मतलब सबसे आगे खड़ा होना भर नहीं, बल्कि सबसे कठिन समय में जिम्मेदारी अपने ऊपर लेना भी है।

यहीं से ऋषभ संब्याल के सफर ने स्कूल की सीमा पार करके वास्तविक सैन्य जीवन की दिशा पकड़ ली।

2014 के आसपास: IMA और फिर सेना की वर्दी

NDA के बाद उनकी ट्रेनिंग का अगला चरण Indian Military Academy, Dehradun था।

कुछ सार्वजनिक प्रोफाइल उनके NDA के बाद 133rd course से जुड़े होने का उल्लेख करते हैं। IMA से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वह भारतीय सेना में अधिकारी बने।

यहीं से छात्र ऋषभ और अधिकारी मेजर ऋषभ के बीच का अंतर पैदा हुआ।

अब जिम्मेदारी सिर्फ अपने लिए नहीं थी।

अब उनके फैसलों का संबंध उनके साथियों, उनकी यूनिट और देश की सुरक्षा से था।

सेना में सफर: Jat Regiment से Special Forces तक

भारतीय सेना में उनके करियर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा Jat Regiment और बाद में 4 PARA Special Forces से जुड़ा रहा।

यह वह दौर था जिसने उन्हें सिर्फ एक अच्छे सैन्य अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले सैनिक के रूप में तैयार किया।

और शायद यही अनुभव बाद में राष्ट्रपति के ADC की जिम्मेदारी निभाने में भी महत्वपूर्ण रहा।

क्योंकि राष्ट्रपति का ADC होना केवल protocol निभाने की नौकरी नहीं है।

हर कार्यक्रम, हर यात्रा और हर सार्वजनिक उपस्थिति के पीछे तैयारी, alertness, coordination और जिम्मेदारी होती है।

26 जनवरी 2021: एक तस्वीर ने कहानी को नया मोड़ दिया

ऋषभ संब्याल का सार्वजनिक परिचय राष्ट्रपति भवन पहुंचने से पहले ही बनना शुरू हो गया था।

26 जनवरी 2021 को Republic Day Parade के दौरान वह Jat Regiment के contingent का नेतृत्व करते नजर आए।

उनके नेतृत्व वाले contingent को Best Marching Contingent Trophy भी मिली।

उस समय शायद बहुत कम लोगों ने सोचा होगा कि कुछ वर्षों बाद यही अधिकारी राष्ट्रपति भवन के गलियारों में देश की प्रथम नागरिक के साथ नजर आएगा।

लेकिन जीवन में कई बड़ी कहानियां इसी तरह बनती हैं


पहले उपलब्धि आती है, पहचान बाद में।

मार्च 2023: राष्ट्रपति के ADC बने

ऋषभ संब्याल के सैन्य जीवन की सबसे प्रतिष्ठित जिम्मेदारियों में से एक तारीख थी

मार्च 2023

इसी दौरान उनका चयन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के Aide-de-Camp यानी ADC के रूप में हुआ।

यह सिर्फ एक नई posting नहीं थी।

यह उस यात्रा का वह मोड़ था जहां एक सैन्य अधिकारी देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के बेहद करीब से काम करने लगा।

राष्ट्रपति भवन में उनका काम राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यक्रमों और protocol से जुड़ी जिम्मेदारियों के साथ-साथ लगातार alert रहने और हर स्थिति के लिए तैयार रहने की मांग करता था।

बाहर से देखने पर वह अक्सर राष्ट्रपति से कुछ कदम पीछे दिखाई देते थे।

लेकिन उन कुछ कदमों के पीछे जिम्मेदारी बहुत बड़ी थी।

8 मार्च 2024: राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी दर्ज हुई मौजूदगी

ऋषभ संब्याल के राष्ट्रपति के साथ काम करने का एक आधिकारिक रिकॉर्ड 8 मार्च 2024 का भी मिलता है।

राष्ट्रपति भवन की Digital Photo Library में दर्ज तस्वीर में Maj R.S. Sambyal राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ दिखाई देते हैं।

यह छोटी-सी तारीख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताती है कि सोशल मीडिया की तस्वीरों से अलग, उनका राष्ट्रपति भवन से जुड़ा कार्यकाल आधिकारिक रिकॉर्ड का भी हिस्सा था।

फिर आया वह दौर जब सैनिक अधिकारी इंटरनेट का चेहरा बन गया

राष्ट्रपति भवन की औपचारिक तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया तक पहुंचे।

फिर इंटरनेट ने अपना काम किया।

एक सैन्य अधिकारी, जिसकी पहचान अब तक मुख्यतः उसकी वर्दी और जिम्मेदारी से थी, अचानक एक अलग तरह की लोकप्रियता का हिस्सा बन गया।

उनकी तस्वीरों पर comments आने लगे।

लोग उनकी personality की चर्चा करने लगे।

और देखते ही देखते उन्हें इंटरनेट ने ‘National Crush’ जैसे नाम दे दिए।

लेकिन यह कहानी का सबसे चमकदार हिस्सा जरूर था, सबसे महत्वपूर्ण नहीं।

क्योंकि जिस व्यक्ति को इंटरनेट कुछ सेकंड की तस्वीर से जानता था, उसे खुद उस तस्वीर तक पहुंचने में करीब एक दशक से ज्यादा का समय लगा था।

राष्ट्रपति मुर्मू के साथ सिर्फ protocol नहीं, एक भावनात्मक रिश्ता भी

करीब तीन वर्षों तक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ काम करने के दौरान संब्याल ने उनके साथ अपने संबंधों को केवल professional relationship तक सीमित नहीं बताया।

हालिया बातचीत में उन्होंने राष्ट्रपति को मां जैसी शख्सियत बताया।

यह बात इस कहानी को एक अलग मानवीय आयाम देती है।

राष्ट्रपति और ADC के बीच protocol की दूरी अपनी जगह है, लेकिन वर्षों तक साथ काम करने के बाद बनने वाला विश्वास और अपनापन उससे अलग चीज है।

शायद इसी वजह से उनके राष्ट्रपति भवन वाले वर्षों को केवल एक posting के रूप में देखना अधूरा होगा।

वह उनके जीवन का ऐसा अध्याय था जिसमें पद के साथ-साथ एक व्यक्तिगत जुड़ाव भी बन गया।

लोकप्रियता के पीछे एक कीमत भी थी

इंटरनेट पर लोकप्रिय होना बाहर से आसान लगता है।

लेकिन किसी सैन्य अधिकारी के लिए यह हमेशा आसान अनुभव नहीं होता।

उनकी निजी जिंदगी को लेकर भी सोशल मीडिया पर तरह-तरह की अफवाहें सामने आईं। संब्याल ने बाद में बताया कि उनके निजी जीवन को लेकर कही गई बातों का असर उनके परिवार पर भी पड़ता था।

यानी जिस इंटरनेट ने उन्हें लोकप्रिय बनाया, वही इंटरनेट कभी-कभी उनकी निजी जिंदगी की सीमा भी पार करने लगा।

यहीं से एक बात समझ आती है

वर्दी में दिखने वाला व्यक्ति भी आखिरकार एक निजी जिंदगी रखने वाला इंसान ही होता है।

2026: जब उन्होंने उस वर्दी को उतारने का फैसला किया

फिर आया वह फैसला जिसकी शायद किसी ने उम्मीद नहीं की थी।

अगस्त 2026 में सामने आया कि मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने लगभग 12 वर्ष की सैन्य सेवा के बाद premature retirement लेने का फैसला किया है। उनकी उम्र उस समय करीब 30 वर्ष थी।

यह खबर इसलिए ज्यादा बड़ी थी क्योंकि वह ऐसे समय सेना से अलग हो रहे थे जब उनका नाम देशभर में चर्चा में था।

जिस वर्दी ने उन्हें पहचान दी थी, उसी वर्दी को उन्होंने अपने जीवन के अगले अध्याय के लिए पीछे छोड़ दिया।

हालिया बातचीत में उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह इस profession को छोड़ेंगे।

यानी यह फैसला उनके लिए भी उतना ही आसान नहीं था जितना बाहर से दिखाई देता है।

करीब 12 साल—और एक पूरा जीवन

अगर इस सफर को सिर्फ तारीखों में देखें तो कहानी कुछ ऐसी दिखाई देती है

सैनिक स्कूल → 2013 NDA → NDA के बाद IMA → भारतीय सेना → Jat Regiment → 4 PARA Special Forces → मार्च 2023 राष्ट्रपति के ADC → 2024 राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक कार्यक्रम → 2026 premature retirement।

लेकिन इन तारीखों के बीच वह चीज छिपी है जिसे कोई timeline पूरी तरह नहीं बता सकती।

एक युवा का धीरे-धीरे सैनिक बनना।

एक अधिकारी का जिम्मेदारियों के साथ बड़ा होना।

राष्ट्रपति के साथ देश के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में खड़ा होना।

कैमरों के बीच रहते हुए भी अपनी professional dignity बनाए रखना।

और फिर अपने जीवन के अगले अध्याय के लिए एक ऐसा फैसला लेना जिसे शायद बहुत लोग समझ भी न पाएं।

इंटरनेट ने चेहरा देखा, सफर ने इंसान बनाया

मेजर ऋषभ सिंह संब्याल की कहानी को सिर्फ ‘National Crush’ की कहानी बनाना आसान है।

लेकिन उस कहानी में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा गायब हो जाएगा।

क्योंकि इंटरनेट ने उन्हें तब देखा जब वह पहले से एक प्रशिक्षित सैन्य अधिकारी थे।

इंटरनेट ने उनकी वर्दी देखी, लेकिन उस वर्दी तक पहुंचने के वर्षों को नहीं देखा।

इंटरनेट ने राष्ट्रपति के साथ उनकी तस्वीर देखी, लेकिन उसके पीछे की जिम्मेदारी नहीं देखी।

इंटरनेट ने उनकी लोकप्रियता देखी, लेकिन उस popularity के साथ आई निजी जिंदगी की मुश्किलें नहीं देखीं।

और इंटरनेट ने उनकी retirement की खबर देखी, लेकिन उस निर्णय तक पहुंचने की पूरी व्यक्तिगत यात्रा शायद कभी नहीं देख पाएगा।

शायद ऋषभ संब्याल की कहानी का सबसे खूबसूरत हिस्सा यही है

कुछ लोग इतिहास में इसलिए नहीं रह जाते क्योंकि वे हमेशा पद पर बने रहते हैं। कुछ लोग इसलिए याद रह जाते हैं क्योंकि उन्होंने अपने हिस्से की जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाई और फिर समय आने पर आगे बढ़ गए।

राष्ट्रपति भवन की तस्वीरों में अब शायद वह चेहरा पहले की तरह नजर न आए।

लेकिन सैनिक स्कूल से शुरू हुआ वह सफर, NDA की ट्रेनिंग से गुजरता हुआ, सेना की वर्दी और Special Forces तक पहुंचकर राष्ट्रपति भवन में दर्ज हुआ और करीब 12 साल बाद एक नए अध्याय में प्रवेश कर गया।

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