नई दिल्ली,
चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद को लेकर सामने आई रिपोर्टों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के बढ़ते विरोध के बीच शनिवार को केंद्रीय चुनाव आयोग की अहम बैठक हुई। बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी मौजूद रहे।
बैठक के बाद चुनाव
आयोग ने एक विस्तृत प्रेस नोट जारी कर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाता सूची, ECINET, सुनवाई की प्रक्रिया और आयोग की आंतरिक
कार्यप्रणाली को लेकर कई फैसलों की जानकारी दी। आयोग
ने यह भी कहा कि SIR से जुड़े फैसले तीनों आयुक्तों की
सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए हैं।
हालांकि, आयोग के बयान के बाद भी राजनीतिक विवाद
खत्म नहीं हुआ। कांग्रेस ने प्रेस नोट को कई सवालों का अधूरा जवाब बताया, जबकि बीजेपी ने कांग्रेस और राहुल गांधी
पर चुनाव आयोग को लेकर गलत दावे करने का आरोप लगाया। NDA के सहयोगी दलों ने आयोग के स्पष्टीकरण का
समर्थन किया।
SIR नोटिस पाने वालों के घर जाएंगे BLO
बैठक में SIR से जुड़े मतदाताओं के लिए एक अहम राहत का
फैसला किया गया है।
आयोग के मुताबिक
जिन मतदाताओं को नाम मैप न होने, विसंगति या किसी
अन्य कारण से नोटिस जारी किया गया है, उनके घर बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO जाएंगे। BLO जरूरी दस्तावेज जुटाकर उन्हें ECINET पर अपलोड करेंगे।
आयोग ने कहा है कि
ऐसे मामलों में सामान्य तौर पर मतदाताओं को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए ERO या AERO कार्यालय नहीं बुलाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन सुनवाई
की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
गरीब और बेघर मतदाताओं के लिए विशेष कैंप
आयोग ने जिला
निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों और बेघर नागरिकों के लिए जरूरत के अनुसार विशेष कैंप और सहायता केंद्र बनाए जाएं।
इसका उद्देश्य यह
सुनिश्चित करना है कि दस्तावेज या आवेदन की प्रक्रिया के कारण कोई पात्र नागरिक
मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रह जाए।
ECINET की दोबारा होगी समीक्षा
बैठक में ECINET को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला हुआ। आयोग ने वरिष्ठ उप
निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति के जरिए ECINET की दोबारा समीक्षा कराने का फैसला किया
है। इस प्रक्रिया में IIT या IIIT के स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ को भी शामिल किया जा सकता है।
आयोग के अनुसार
समीक्षा का उद्देश्य यह देखना है कि ECINET कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं।
राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से मिले सुझावों के आधार पर पोर्टल में पहले
भी कई बदलाव किए जा चुके हैं।
अब भविष्य में IT मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी नई पहल आयोग
के सामने मंजूरी के लिए आने से पहले संबंधित अधिकारियों की समिति में चर्चा की
जाएगी।
दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी समयसीमा
SIR से जुड़े दावे और आपत्तियां दाखिल करने
की समयसीमा दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ाई गई है।
दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम
तारीख अब 30 अक्टूबर 2026 होगी, जबकि इनके निस्तारण की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक कर दी गई है।
महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम
तारीख 12 अक्टूबर 2026 और नोटिस तथा दावे-आपत्तियों के निस्तारण की समयसीमा 10 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है।
छूटे हुए नामों के लिए आवेदन का रास्ता खुला
आयोग ने कहा कि SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी जिन
पात्र लोगों का नाम मतदाता सूची में नहीं जुड़ पाया है, वे संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) के पास आवेदन कर सकते हैं।
पहली बार मतदाता
बनने वाले युवाओं के लिए भी राज्यों में विशेष नामांकन अभियान चलाने के निर्देश
दिए गए हैं।
आयोग के अनुसार
बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों एवं
केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया पूरी
हो चुकी है।
Form 6 को लेकर क्या कहा आयोग ने?
Form 6 को लेकर भी विवाद सामने आया था। आयोग ने
अपने स्पष्टीकरण में कहा कि SIR के दौरान इस्तेमाल
किए जाने वाले Form 6 के साथ लगा घोषणा-पत्र सुप्रीम कोर्ट
द्वारा बरकरार रखा गया है।
वहीं, SIR की अवधि के बाहर सामान्य मतदाता पंजीकरण
के लिए Registration of
Electors Rules, 1960 के तहत Form 6 का इस्तेमाल किया जाएगा।
यही मुद्दा
कांग्रेस की आपत्तियों में भी प्रमुख रहा है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सवाल
उठाया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में SIR के बाद पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के लिए इस
व्यवस्था का क्या असर होगा।
14 आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद आया आयोग का स्पष्टीकरण
यह पूरा घटनाक्रम
उस समय सामने आया है जब The Indian
Express की एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया कि
दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले महीनों में SIR और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े कई फैसलों पर आपत्तियां
दर्ज की थीं।
रिपोर्ट में Form 6 में बदलाव, ECINET के केंद्रीकरण और मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया
जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया था।
इसके बाद आयोग की
शनिवार की बैठक और प्रेस नोट को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आयोग ने
स्पष्ट रूप से कहा कि SIR से जुड़े प्रमुख फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत
मंजूरी से लिए गए थे।
गोवा के 97 मतदाताओं का मामला भी चर्चा में
गोवा में 97 मतदाताओं के नाम से जुड़ा मामला भी विवाद
का हिस्सा बना हुआ है।
आयोग ने बताया कि
गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित BLO को निर्देश दिया है कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से छूट गए
हैं, उनके घर जाकर उनसे Form 6 जमा कराया जाए।
कांग्रेस ने
हालांकि सवाल उठाया कि यदि इन मतदाताओं के नाम पहले सूची से बाहर हुए थे, तो वे नाम हटे ही क्यों थे, इसका स्पष्ट जवाब अभी भी नहीं मिला है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस ने आयोग
के प्रेस नोट पर संतोष व्यक्त नहीं किया। पार्टी नेता पवन खेड़ा ने इसे अधूरा
बताते हुए कहा कि आयोग ने कई महत्वपूर्ण सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दिया है।
कांग्रेस की ओर से
खास तौर पर Form 6, युवा मतदाताओं और ECINET की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए हैं। पार्टी का
कहना है कि केवल यह कहना कि फैसले सर्वसम्मति से लिए गए, उन प्रक्रियात्मक सवालों का पूरा जवाब
नहीं है जो रिपोर्ट के बाद सामने आए हैं।
बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया
दूसरी ओर बीजेपी
ने चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण को विपक्ष के आरोपों का जवाब बताया।
बीजेपी नेताओं ने
कहा कि आयोग के बयान से स्पष्ट है कि SIR से जुड़े फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए
थे। पार्टी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर चुनाव आयोग के खिलाफ गलत और आधारहीन
आरोप लगाने का आरोप लगाया।
NDA के सहयोगी टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू
ने भी आयोग के स्पष्टीकरण का स्वागत करते हुए कहा कि इससे मामले को लेकर बनी
गलतफहमियां दूर होती हैं।
आयोग की बैठकों में भी आएगा बदलाव
चुनाव आयोग ने
अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर भी कुछ फैसले किए हैं।
अब आयोग की बैठकों
का एजेंडा पहले से प्रसारित किया जाएगा और
बैठकों के मिनट्स जारी किए जाएंगे। इसके अलावा अधिकारियों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट भी निर्धारित
समयसीमा में पूरी करने की बात कही गई है।
असली सवाल अब भी SIR की प्रक्रिया पर
शनिवार की बैठक के
बाद आयोग ने SIR को लेकर मतदाताओं के लिए कुछ
प्रक्रियात्मक राहतों का ऐलान किया है। BLO द्वारा घर जाकर दस्तावेज लेने, ऑनलाइन सुनवाई, विशेष सहायता शिविर और ECINET की समीक्षा जैसे फैसले सीधे मतदाता
प्रक्रिया से जुड़े हैं।
लेकिन दूसरी तरफ, Form 6 में बदलाव, ECINET के संचालन और गोवा के 97 मतदाताओं के मामले को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों पर
राजनीतिक बहस जारी है।
इस बीच आयोग का
आधिकारिक रुख यह है कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे, जबकि विपक्ष इन प्रक्रियाओं और निर्णयों
की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है। इसलिए फिलहाल विवाद का केंद्र केवल SIR नहीं, बल्कि चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और उसकी
पारदर्शिता भी बन गई है।
