Bihar News:- जमुई मामला: अब तक क्या हुआ, पुलिस कार्रवाई से लेकर राजनीतिक विवाद तक



जमुई,


बिहार के जमुई में 19 सितंबर को दो नाबालिग छात्रों के साथ बदसलूकी और छेड़छाड़ का वीडियो सामने आने के बाद मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। घटना के बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की, SIT गठित की गई और आरोपियों की पहचान के लिए वीडियो फुटेज की जांच की गई। 22 सितंबर तक पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ मामला राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन गया है।

19 सितंबर को क्या हुआ?

पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 19 सितंबर की शाम जमुई के मड़वा पहाड़ इलाके के पास कोचिंग से लौट रहे 10वीं कक्षा के एक नाबालिग छात्र और छात्रा को युवकों के एक समूह ने रोका। दोनों के साथ कथित तौर पर बदसलूकी और मारपीट की गई और घटना का वीडियो बनाया गया।

घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की पहचान शुरू की। पुलिस के अनुसार वीडियो के आधार पर करीब सात संदिग्धों की पहचान की गई।

FIR और SIT जांच

जमुई पुलिस ने मामले में संबंधित धाराओं और POCSO Act के तहत प्राथमिकी दर्ज की। जांच के लिए Special Investigation Team (SIT) गठित की गई है। पुलिस का कहना है कि घटना में शामिल सभी आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

गिरफ्तारियों पर बड़ा अपडेट

शुरुआती कार्रवाई में तीन नाबालिग आरोपियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने छापेमारी जारी रखी।

22 सितंबर को मुख्य आरोपी बताए जा रहे नंदन यादव को पुलिस कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक कार्रवाई के दौरान उसके पैर में गोली लगी और उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। बाद की रिपोर्टों में कुल पांच आरोपियों के पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है।

वायरल वीडियो को लेकर भी बड़ी कार्रवाई

पुलिस ने घटना में शामिल आरोपियों के अलावा उस वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की है।

जमुई साइबर थाने में करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइलों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार इन प्रोफाइलों पर नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को प्रसारित करने का आरोप है।

पुलिस ने लोगों से वीडियो को आगे शेयर या रीपोस्ट नहीं करने की अपील की है।

महिला आयोग भी सक्रिय

मामले का संज्ञान राष्ट्रीय महिला आयोग और बिहार महिला आयोग ने भी लिया है। दोनों स्तरों पर प्रशासन से मामले की जानकारी और कार्रवाई की रिपोर्ट मांगे जाने की बात सामने आई है।

पुलिस की भूमिका पर सवाल

घटना के बाद पुलिस की पेट्रोलिंग और कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं। विपक्ष ने घटना को आधार बनाकर राज्य सरकार पर हमला बोला है और महिलाओं एवं छात्राओं की सुरक्षा को लेकर सरकार से जवाब मांगा है।

वहीं पुलिस का कहना है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए तेजी से कार्रवाई की गई तथा जांच निष्पक्ष तरीके से जारी है।

राजनीतिक विवाद क्यों बढ़ा?

मामले में पुलिस कार्रवाई के साथ नेताओं के बयानों ने भी राजनीतिक बहस को तेज कर दिया।

बिहार सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने 21 सितंबर को जमुई मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसी 'छिटपुट घटनाएं' होती रहती हैं। साथ ही उन्होंने घटना पर दुख जताते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और मामले की जांच की बात कही।

उनके इस बयान के बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया कि नाबालिग से जुड़ी ऐसी गंभीर घटना को 'छिटपुट' कहकर कैसे देखा जा सकता है।

JDU प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा का बयान

इसी बीच JDU के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के बयान को लेकर भी विवाद हुआ। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने भी घटना को 'छिटपुट' बताया। इसके बाद विपक्ष ने दोनों बयानों को लेकर सरकार और JDU पर सवाल उठाए।

हालांकि सत्ता पक्ष की ओर से यह भी कहा गया कि दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

तेजस्वी यादव और विपक्ष का हमला

RJD नेता तेजस्वी यादव ने घटना को लेकर बिहार सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधा तथा राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। विपक्षी दलों ने घटना को महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा से जोड़ते हुए सरकार से जवाबदेही की मांग की।

विपक्ष की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि अगर सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर प्रभावी व्यवस्था का दावा करती है, तो ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर पुलिस व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

सत्ता पक्ष का जवाब

सत्ता पक्ष की ओर से पुलिस की कार्रवाई का हवाला दिया गया है। JD(U) के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह ने कहा कि किसी एक घटना के आधार पर पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था का आकलन नहीं किया जाना चाहिए। BJP की ओर से भी पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया गया।

फिलहाल मामले में पुलिस की जांच जारी है। SIT को घटना में शामिल सभी आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करनी है। साथ ही वायरल वीडियो को प्रसारित करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स पर दर्ज मामलों की भी जांच होगी।

राजनीतिक स्तर पर यह मामला बिहार में कानून-व्यवस्था, महिला एवं बाल सुरक्षा और सरकार की जवाबदेही को लेकर बहस का मुद्दा बन चुका है। वहीं कानूनी स्तर पर आगे की कार्रवाई जांच और अदालत की प्रक्रिया के अनुसार होगी।

22 सितंबर 2026 तक स्थिति: पुलिस कार्रवाई में गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ी है, मुख्य आरोपी नंदन यादव के घायल होकर पकड़े जाने की खबर सामने आई है, करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइलों पर अलग FIR दर्ज हुई है और श्रवण कुमार तथा JDU प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के 'छिटपुट' वाले बयानों को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है।
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