भागलपुर में पानी उतर रहा, लेकिन संकट नहीं: खेतों में बर्बाद फसल, बांध पर जिंदगी और घर लौटने का इंतजार

पानी घटा, लेकिन भागलपुर के गांवों में संकट बरकरार; खेतों में बर्बादी और घर लौटने का इंतजार

रितिक झा

भागलपुर: गंगा का जलस्तर अब नीचे आने लगा है, लेकिन भागलपुर के बाढ़ प्रभावित इलाकों में मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। शहर और कई बस्तियों से पानी पीछे हट रहा है, मगर दियारा और निचले इलाकों में जलजमाव अब भी लोगों की जिंदगी रोक रहा है। कई परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल है घर कब लौटेंगे और खेत में बचा क्या है?

20 सितंबर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भागलपुर में पिछले 24 घंटे में गंगा का जलस्तर करीब 24 सेंटीमीटर घटा और नदी खतरे के निशान से नीचे आ गई। लेकिन सुल्तानगंज और कहलगांव जैसे इलाकों में स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।

पानी घटा, लेकिन गांवों में वापसी आसान नहीं

नवगछिया के इस्माईलपुर, गोपालपुर और रंगरा जैसे इलाकों में कई विस्थापित परिवार अब भी ऊंची सड़कों और तटबंधों के आसपास रहने को मजबूर हैं। निचले इलाकों में पानी और दलदल के कारण घर तक पहुंचना मुश्किल है।

स्थानीय स्थिति की रिपोर्टिंग में यह भी सामने आया है कि कुछ परिवारों को घर लौटने में 15 से 20 दिन तक लग सकते हैं। पानी उतरने के बाद भी कीचड़, जलजमाव और क्षतिग्रस्त रास्ते वापसी में बाधा बने हुए हैं।

खेत बचे नहीं, अगली फसल की चिंता शुरू

बाढ़ का सबसे बड़ा असर खेतों पर दिखाई दे रहा है। भागलपुर के कई इलाकों में धान और मक्का की फसल लंबे समय तक पानी में डूबी रही। प्रशासन अभी नुकसान का विस्तृत आकलन कर रहा है और अधिकारियों के अनुसार पानी पूरी तरह उतरने के बाद घरों और खेतों का विस्तृत सर्वे किया जाएगा।

भागलपुर की पहचान से जुड़ी कतरनी धान की फसल भी बाढ़ की चपेट में आई है। एक स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार भागलपुर, बांका और मुंगेर में लगभग 2,099 एकड़ कतरनी धान की फसल कई दिनों तक पानी में डूबी रही। किसानों को डर है कि लंबे समय तक जलजमाव से फसल खराब हो सकती है।

यानी किसान के लिए नुकसान सिर्फ इस साल की फसल तक सीमित नहीं है। बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई पर लगा पैसा डूबने के बाद अगली खेती के लिए पूंजी जुटाना भी चुनौती बन सकता है।

9.39 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

17 सितंबर को जिला प्रशासन की जानकारी के मुताबिक भागलपुर में 111 पंचायत, 447 गांव और 892 वार्ड बाढ़ से प्रभावित हुए थे। कुल 2,17,168 परिवार और 9,39,791 लोग प्रभावित बताए गए थे। 24,812 लोगों को सुरक्षित निकाला गया था और 80,701 पशुओं को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

राहत और बचाव के लिए 126 नावें चलाए जाने की जानकारी भी प्रशासन ने दी थी।

असली नुकसान पानी उतरने के बाद सामने आएगा

भागलपुर में बाढ़ से हुए कुल नुकसान का शुरुआती अनुमान करीब 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई है। इसमें फसल, सड़क और तटबंधों समेत कई तरह का नुकसान शामिल है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक तस्वीर पानी पूरी तरह उतरने और विस्तृत सर्वे के बाद ही सामने आएगी।

यही वजह है कि अभी सामने आ रहे आंकड़ों को अंतिम आंकड़ा मानना जल्दबाजी होगी।

राहत मिली, लेकिन सवाल बाकी हैं

केंद्र और राज्य सरकार की ओर से राहत अभियान चलाया जा रहा है। 16 सितंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री के साथ भागलपुर समेत बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और राहत शिविरों में लोगों से मुलाकात की। सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों के खातों में 7,000 रुपये की तत्काल सहायता भेजने की जानकारी दी गई है।

लेकिन बाढ़ उतरने के बाद असली परीक्षा शुरू होगी।

क्या किसानों को उनकी वास्तविक फसल क्षति के हिसाब से सहायता मिल पाएगी?
क्या टूटे रास्ते और तटबंध समय पर ठीक होंगे?
और क्या अगले मानसून से पहले उन इलाकों में ऐसी व्यवस्था तैयार होगी, जिससे हर साल बाढ़ आने पर लोगों को घर छोड़कर तटबंधों पर न रहना पड़े?

भागलपुर में पानी जरूर घट रहा है, लेकिन बाढ़ की कीमत अभी लोग चुका रहे हैं।

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