Bihar News:- बिहार में 30 हजार भूमिहीन परिवारों को मिलेगी जमीन, 20 नवंबर को चलेगा महा अभियान; जानें किस जिले को कितना लक्ष्य



पटना:
बिहार में भूमिहीन परिवारों को घर बनाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है। राज्य सरकार ने 20 नवंबर 2026 को विशेष अभियान चलाकर करीब 30 हजार भूमिहीन परिवारों को वासभूमि का पर्चा देने का लक्ष्य रखा है। यह अभियान अभियान बसेरा-2 के तहत चलाया जाएगा।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इसको लेकर जिलों को लक्ष्य भी दिया है। इसके तहत पात्र भूमिहीन परिवारों को घर बनाने के लिए वासभूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

20 नवंबर को एक साथ चलेगा विशेष अभियान

सरकार की योजना के अनुसार 20 नवंबर को राज्य के अलग-अलग जिलों में विशेष अभियान चलाकर चयनित लाभुकों को बंदोबस्ती प्रमाण-पत्र यानी पर्चा दिया जाएगा। विभाग ने अधिकारियों को पात्र परिवारों की पहचान और लंबित मामलों को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है।

अभियान बसेरा-2 का उद्देश्य ऐसे परिवारों को वासभूमि उपलब्ध कराना है, जिनके पास अपना घर बनाने के लिए जमीन नहीं है। योजना के तहत पात्र परिवारों को सामान्य तौर पर तीन डिसमिल तक वासभूमि उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

हालांकि, किसी परिवार को जमीन उपलब्ध कराने से पहले उसके पात्रता संबंधी दस्तावेजों और जमीन की उपलब्धता की जांच की जाती है।

किन परिवारों को मिलेगा लाभ?

इस अभियान में मुख्य रूप से उन भूमिहीन परिवारों को शामिल किया जाएगा, जो निर्धारित मानकों के अनुसार पात्र हैं और जिनके पास अपना घर बनाने के लिए पर्याप्त जमीन नहीं है।

अंचल स्तर पर ऐसे परिवारों की पहचान, दस्तावेजों की जांच और जमीन की उपलब्धता की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके बाद पात्र लाभुकों को बंदोबस्ती प्रमाण-पत्र दिया जाता है।

विभाग ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि जिन परिवारों को पहले पर्चा मिल चुका है लेकिन उन्हें अभी तक जमीन पर वास्तविक कब्जा नहीं मिला है, उनके मामलों की भी समीक्षा की जाए।

किस जिले को कितना लक्ष्य?

30 हजार भूमिहीन परिवारों को पर्चा देने के लिए बिहार के सभी जिलों को अलग-अलग लक्ष्य दिया गया है। उपलब्ध लक्ष्य के अनुसार सबसे अधिक लक्ष्य पटना जिले के लिए रखा गया है।

कुछ प्रमुख जिलों का लक्ष्य इस प्रकार है—

  • पटना: 1,709 परिवार

  • पूर्वी चंपारण: 1,493

  • मुजफ्फरपुर: 1,405

  • मधुबनी: 1,314

  • गया: 1,285

  • समस्तीपुर: 1,247

  • सारण: 1,157

  • दरभंगा: 1,153

  • सीतामढ़ी: 1,002

  • सीवान: 975

  • कटिहार: 899

  • पश्चिम चंपारण: 891

  • भागलपुर: 889

  • रोहतास: 866

  • बेगूसराय: 870

  • नालंदा: 842

  • अररिया: 823

  • भोजपुर: 799

  • गोपालगंज: 750

  • पूर्णिया: 745

इसके अलावा राज्य के अन्य जिलों के लिए भी अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

सिर्फ पर्चा देना ही काफी नहीं

भूमिहीन परिवारों को जमीन का पर्चा मिलना उनके लिए महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके बाद जमीन पर वास्तविक कब्जा मिलना भी उतना ही जरूरी है।

कई मामलों में बंदोबस्ती की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी जमीन की पहचान, सीमांकन या कब्जे को लेकर समस्या सामने आती है। इसी को देखते हुए विभाग ने पहले से पर्चा प्राप्त लाभुकों के मामलों की भी समीक्षा करने को कहा है।

यानी सरकार की कोशिश केवल कागज पर जमीन आवंटित करने तक सीमित न रहे, बल्कि पात्र परिवारों को जमीन का वास्तविक लाभ भी मिले।

पहले भी चल चुका है अभियान

अभियान बसेरा के तहत बिहार में इससे पहले भी बड़ी संख्या में भूमिहीन परिवारों को वासभूमि उपलब्ध कराने की कार्रवाई की गई है। अभियान बसेरा-2 में हजारों पात्र परिवारों को पहले ही बंदोबस्ती प्रमाण-पत्र दिया जा चुका है।

अब 20 नवंबर के प्रस्तावित विशेष अभियान के जरिए 30 हजार और परिवारों को जमीन का पर्चा देने की तैयारी है।

घर बनाने की दिशा में मिलेगा आधार

भूमिहीन परिवारों के लिए सबसे बड़ी समस्या अक्सर घर बनाने के लिए जमीन की होती है। जमीन मिलने के बाद परिवार सरकारी आवास योजनाओं समेत अन्य आवासीय सुविधाओं का लाभ लेने की दिशा में आगे बढ़ सकता है, यदि वह संबंधित योजनाओं की पात्रता पूरी करता है।

इस लिहाज से 20 नवंबर का अभियान उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, जो लंबे समय से अपनी जमीन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

हालांकि लाभुकों को यह समझना जरूरी है कि पर्चा मिलने के बाद जमीन का सीमांकन और वास्तविक दखल-कब्जा जैसी प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होती हैं।

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