UPI का नया नियम: Merchant कौन है और ट्रेन-फ्लाइट टिकट खरीदने पर क्या बदलेगा?


विशेष रिपोर्ट|राजू सिंह 

UPI को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक सवाल तेजी से चर्चा में है क्या ₹2,000 से ज्यादा UPI Payment करने पर अब आम लोगों से पैसे काटे जाएंगे? इस सवाल के पीछे वजह है UPI के Merchant Discount Rate यानी MDR से जुड़ा नया framework.

लेकिन इस पूरे बदलाव को केवल “UPI पर चार्ज लग गया” कहकर समझना अधूरा होगा। असल बदलाव यह है कि पहली बार बड़े merchant transactions के लिए payment ecosystem में MDR की व्यवस्था लाई गई है, जबकि आम व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI payments को इससे बाहर रखा गया है।

Merchant आखिर है कौन?

Merchant का मतलब सिर्फ दुकान वाला नहीं है।

जब आप किसी व्यक्ति को पैसे भेजते हैं जैसे दोस्त या परिवार के सदस्य को तो वह Person-to-Person यानी P2P payment है।

लेकिन जब आप किसी व्यवसाय या संस्था को सामान या सेवा के बदले भुगतान करते हैं, तो वह Person-to-Merchant यानी P2M payment है।

यानी दुकान, ऑनलाइन shopping platform, airline, railway या कोई service provider इन सभी को व्यापक अर्थ में merchant category में समझा जा सकता है।

यही अंतर नए नियम को समझने की सबसे जरूरी कड़ी है।

सरकार ने नया framework क्यों बनाया?

UPI पिछले कुछ वर्षों में इतना बड़ा payment network बन चुका है कि इसके पीछे banks, payment service providers, apps, cybersecurity systems और दूसरे infrastructure पर लगातार खर्च होता है।

सरकार का कहना है कि UPI को लंबे समय तक मजबूत, सुरक्षित और टिकाऊ बनाए रखने के लिए payment ecosystem के पास एक viable revenue model होना जरूरी है। नए framework के तहत बड़े merchant transactions से मिलने वाला MDR इसी ecosystem के अलग-अलग participants के बीच बांटा जाएगा।

यानी सरकार का तर्क यह है कि UPI को मुफ्त रखते हुए भी उसके infrastructure और expansion को financially sustainable बनाया जाए।

क्या अब आम आदमी से UPI का पैसा काटा जाएगा। 

सरकारी स्पष्टीकरण के मुताबिक P2P UPI transactions पर कोई MDR नहीं लगाया गया है, चाहे रकम कितनी भी हो।

इसके अलावा ₹2,000 तक के merchant payments भी zero-MDR व्यवस्था में रहेंगे। सरकार के अनुसार लगभग 96% merchant transactions इस नए MDR framework से प्रभावित नहीं होंगे।

इसलिए इसे यह कहना सही नहीं होगा कि “अब हर ₹2,000 से ज्यादा UPI payment पर ग्राहक से charge लिया जाएगा।”

नियम merchant-side payment ecosystem पर लागू होता है, ग्राहक पर सीधे नहीं।

फिर MDR किसकी जिम्मेदारी होगी?

नए framework में निर्धारित ₹2,000 से ऊपर के merchant transactions पर 0.4% MDR रखा गया है। ₹75,000 या उससे अधिक के transactions में इसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति transaction होगी। यह राशि payment ecosystem के विभिन्न participants जैसे banks और payment service providers‌ के बीच वितरित की जाएगी।

सरकार ने यह भी कहा है कि banks को यह सुनिश्चित करना होगा कि merchant MDR को ग्राहक पर सीधे न डाले।

यानी किसी दुकान या platform के जरिए UPI payment करते समय ग्राहक को अलग से यह नहीं कहा जाना चाहिए कि “UPI से भुगतान करने पर MDR देना होगा।”

अब सवाल ट्रेन और फ्लाइट टिकट का

यहीं से यह नियम आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से सीधे जुड़ता है।

मान लीजिए कोई व्यक्ति रेलवे की महंगी टिकट खरीदता है या फ्लाइट टिकट बुक करता है और भुगतान UPI से करता है। यह किसी व्यक्ति को पैसे भेजना नहीं, बल्कि किसी service provider को payment करना है। इसलिए यह merchant transaction की category में आ सकता है।

लेकिन हर merchant को एक जैसा MDR नहीं देना होगा।

रेलवे जैसे essential और thin-margin sectors के लिए अलग व्यवस्था बनाई गई है। रेलवे, telecom, insurance, fuel और agricultural inputs जैसे sectors में ₹2,000 से ऊपर के transaction पर ₹5 का flat MDR निर्धारित किया गया है।

इसका उद्देश्य इन जरूरी सेवाओं पर बड़े percentage-based MDR का बोझ डालने के बजाय एक निश्चित charge रखना बताया गया है।

फ्लाइट टिकट के मामले में क्या होगा?

Flight booking को लेकर तस्वीर थोड़ी अलग है क्योंकि airline या booking platform किस merchant category में आता है, यह महत्वपूर्ण होगा।

यदि transaction सामान्य निर्धारित merchant category में आता है, तो नए MDR framework के तहत applicable rate लग सकता है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि passenger के UPI account से MDR अलग से काट लिया जाएगा।

Flight booking में पहले से कई तरह के charges हो सकते हैं जैसे taxes, convenience fee या service-related charges। इसलिए भविष्य में ticket booking करते समय ग्राहक के लिए final payable amount देखना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।

दूसरे शब्दों में, MDR और booking platform की convenience fee एक ही चीज नहीं हैं।

छोटे दुकानदारों को लेकर भी बड़ी तस्वीर है

सरकार ने छोटे merchants को नए framework से बचाने के लिए zero-MDR व्यवस्था जारी रखी है।

P2PM category में आने वाले छोटे merchants, जिनमें street vendors और neighbourhood shops शामिल हैं, अगर UPI QR के जरिए महीने में निर्धारित सीमा तक payment प्राप्त करते हैं, तो उन्हें zero MDR का लाभ मिलता रहेगा। सरकारी framework में ₹1 लाख मासिक receipt तक की यह व्यवस्था बताई गई है।

इसका मतलब यह है कि मोहल्ले की छोटी दुकान पर UPI से payment करने वाले ग्राहक को सिर्फ इस वजह से अतिरिक्त charge देने की स्थिति नहीं बननी चाहिए कि उसने UPI इस्तेमाल किया।

असली बदलाव कहां है?

असल बदलाव UPI के इस्तेमाल के तरीके में नहीं, बल्कि उसके पीछे के business model में है।

अब तक UPI को बड़े पैमाने पर एक ऐसा digital payment system माना गया जहां ग्राहक के लिए payment मुफ्त है और merchants के लिए भी MDR व्यवस्था व्यापक रूप से zero थी।

नए framework में बड़े merchant transactions से payment ecosystem को revenue मिलेगा।

सरकार का तर्क है कि इससे banks, payment companies और infrastructure providers को UPI की security, technology और expansion में निवेश करने के लिए आर्थिक आधार मिलेगा।

लेकिन इसका दूसरा पहलू भी महत्वपूर्ण है।

भले ही MDR ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाए, लेकिन किसी भी business के लिए payment cost अंततः उसकी overall operating cost का हिस्सा बन सकती है। इसलिए आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बड़े merchants इस अतिरिक्त लागत को अपने business में किस तरह absorb करते हैं।

क्या इससे UPI की आदत बदल जाएगी?

फिलहाल सरकारी framework को देखें तो रोजमर्रा के छोटे payments पर कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखता।

चाय, किराना, छोटी shopping या सामान्य छोटे merchant payments के लिए zero-MDR व्यवस्था जारी है।

वहीं बड़े merchant payments के लिए नया revenue structure बनाया गया है।

इसलिए इस बदलाव को “UPI खत्म” या “UPI महंगा” होने के रूप में देखना सही तस्वीर नहीं देता।

असल कहानी यह है कि भारत जिस UPI ecosystem को वर्षों से मुफ्त digital payment infrastructure के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, उसके बड़े commercial transactions से अब payment ecosystem को revenue देने की व्यवस्था बनाई गई है।

आम आदमी को क्या याद रखना चाहिए?

इस पूरे बदलाव को चार बातों में समझा जा सकता है

पहला, व्यक्ति से व्यक्ति को UPI payment पहले की तरह मुफ्त रहेगा।

दूसरा, ₹2,000 तक के merchant payments और eligible small merchants के transactions zero-MDR व्यवस्था में रहेंगे।

तीसरा, निर्धारित बड़े merchant transactions पर MDR लागू होगा, लेकिन यह ग्राहक पर सीधे charge के रूप में लगाने के लिए नहीं है।

चौथा, रेलवे जैसे essential sectors के लिए अलग flat MDR व्यवस्था रखी गई है, जबकि flight booking जैसे मामलों में merchant category और booking platform की व्यवस्था देखना जरूरी होगा।

UPI के नए नियम की सबसे बड़ी खबर यह नहीं है कि “अब ₹2,000 से ज्यादा UPI करने पर पैसा कटेगा।” असली खबर यह है कि भारत के सबसे बड़े digital payment network के लिए अब एक नया merchant-side revenue framework तैयार किया गया है।

सरकार इसे UPI को लंबे समय तक financially sustainable रखने की दिशा में कदम बता रही है। वहीं आम ग्राहक के लिए फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि P2P payments मुफ्त हैं और सरकार के अनुसार MDR को ग्राहक पर डालने की अनुमति नहीं है।

आने वाले समय में इस व्यवस्था का वास्तविक असर इस बात से तय होगा कि बड़े merchants और payment ecosystem इस लागत को किस तरह संभालते हैं और क्या इसका कोई अप्रत्यक्ष प्रभाव ticketing, online services या दूसरे commercial payments की pricing पर दिखाई देता है।

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