Bihar News:- बिहार में बाढ़ ने किसानों की फसल पर भी फेर दिया पानी, करीब ₹270 करोड़ का नुकसान



पटना:
बिहार में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन इसके साथ तबाही की तस्वीर और साफ होती जा रही है। घर, सड़क और पुलों के साथ किसानों की खड़ी फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कृषि विभाग के शुरुआती आकलन के मुताबिक, राज्य के 18 बाढ़ प्रभावित जिलों में करीब ₹270 करोड़ मूल्य की फसल बर्बाद होने का अनुमान है। हालांकि, यह अंतिम आंकड़ा नहीं है। पानी पूरी तरह उतरने के बाद खेतों का विस्तृत सर्वे किया जाएगा, जिसके बाद नुकसान का वास्तविक आंकड़ा सामने आएगा।

1.76 लाख हेक्टेयर फसल पर पड़ा बाढ़ का असर

कृषि विभाग को मिली शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ से प्रभावित 18 जिलों के 102 प्रखंडों में लगभग 1.76 लाख हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है। इनमें धान, मक्का, केला और सब्जियों समेत कई फसलें शामिल हैं।

वहीं, 18 सितंबर की एक रिपोर्ट में कृषि विभाग के शुरुआती अनुमान के आधार पर करीब 1 लाख हेक्टेयर में खड़ी फसल को नुकसान और लगभग ₹200 से ₹250 करोड़ की संभावित सहायता की जरूरत बताई गई है। इससे साफ है कि अलग-अलग चरणों में किए जा रहे आकलन के कारण नुकसान का आंकड़ा अभी बदल सकता है।

भागलपुर और भोजपुर में सबसे ज्यादा नुकसान

शुरुआती जिला-वार आंकड़ों में भागलपुर सबसे अधिक प्रभावित जिलों में सामने आया है। यहां करीब 45 हजार हेक्टेयर फसल बर्बाद होने का अनुमान है। इसके बाद भोजपुर में लगभग 25 हजार हेक्टेयर, बेगूसराय में करीब 21 हजार हेक्टेयर और समस्तीपुर में लगभग 10 हजार हेक्टेयर फसल को नुकसान बताया गया है।

पटना, वैशाली, खगड़िया, बक्सर, लखीसराय, रोहतास, सारण, कटिहार, पश्चिम चंपारण, मुंगेर, अरवल, शेखपुरा और पूर्णिया जैसे जिलों में भी फसल क्षति दर्ज की गई है।

वैशाली में 7,455 हेक्टेयर फसल पूरी तरह बर्बाद

वैशाली जिले की स्थिति भी गंभीर रही। जिला कृषि पदाधिकारी की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, छह प्रखंडों की 41 पंचायतों में 10,669 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि जलमग्न हुई। इनमें करीब 7,455 हेक्टेयर में लगी फसल पूरी तरह बर्बाद होने की बात सामने आई है। प्रभावित फसलों में धान, मक्का, केला, जनेरा और सब्जियां शामिल हैं।

राघोपुर दियारा में नुकसान विशेष रूप से ज्यादा रहा। यहां केले के बागान कई दिनों तक पानी में डूबे रहे। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ इलाकों में केले के पौधे 15 से 20 दिनों तक पानी में डूबे रहे, जिससे बड़ी संख्या में फसल खराब हो गई।

किसानों के सामने अब अगली फसल की चुनौती

बाढ़ में फसल बर्बाद होने का असर केवल एक सीजन की कमाई तक सीमित नहीं रहता। किसान को बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई पर किया गया खर्च भी वापस नहीं मिल पाता। कई किसानों के सामने अगली फसल शुरू करने के लिए दोबारा पूंजी जुटाने की चुनौती खड़ी हो सकती है।

16 सितंबर को बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी जलमग्न खेतों और बर्बाद केले तथा मक्के की फसलों का जायजा लिया था। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से फसल नुकसान के आधार पर सहायता देने की बात कही गई है।

सरकार कर रही है नुकसान का आकलन

बिहार सरकार ने कहा है कि बाढ़ से प्रभावित किसानों को नियमानुसार कृषि इनपुट सब्सिडी और अन्य सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। 15 सितंबर को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी में बताया गया था कि करीब 55 हजार हेक्टेयर भूमि पर बाढ़ का प्रभाव पड़ा, जिससे फसलों को नुकसान हुआ है। साथ ही सरकार ने वास्तविक नुकसान का गंभीरता से आकलन करने के निर्देश दिए थे।

इसलिए फिलहाल ₹270 करोड़ का आंकड़ा अंतिम नहीं माना जा सकता। पानी पूरी तरह उतरने के बाद खेतों का सर्वे और नुकसान के सत्यापन के बाद ही यह पता चलेगा कि बिहार के किसानों की कुल कितनी फसल और कितने रुपये का नुकसान हुआ।

बिहार की इस बाढ़ ने किसानों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है पहले खड़ी फसल का नुकसान और फिर अगली फसल के लिए पूंजी की जरूरत। शुरुआती आंकड़े करीब ₹270 करोड़ के फसल नुकसान की तस्वीर दिखा रहे हैं, लेकिन अंतिम सर्वे के बाद नुकसान का आंकड़ा बढ़ भी सकता है। ऐसे में किसानों के लिए समय पर मुआवजा, बीज और कृषि इनपुट सहायता महत्वपूर्ण होगी।

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