Bihar News:- तेजस्वी के तंज पर सम्राट चौधरी का पलटवार, नीतीश और लालू के पुराने सियासी समीकरणों का किया जिक्र

 


बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। सम्राट चौधरी ने तेजस्वी यादव के ‘चुने हुए नहीं, चुने गए नेता’ वाले तंज पर पलटवार करते हुए नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री बनने से जुड़े पुराने राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र किया।

‘नीतीश कुमार ने अपनी इच्छा से छोड़ा मुख्यमंत्री पद’

सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को एक मीडिया समूह के कार्यक्रम में कहा कि नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद अपनी इच्छा से छोड़ा था और भाजपा ने उनसे पद छोड़ने के लिए नहीं कहा था।

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार अब राज्यसभा सांसद हैं और बिहार में NDA के ‘निर्विवाद नेता’ बने हुए हैं। चौधरी के मुताबिक, नीतीश कुमार ने खुद इस बात का उल्लेख किया था कि जब भाजपा के पास उनकी पार्टी से अधिक विधायक थे, तब भी अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनने का अवसर दिया था और वह अब उस राजनीतिक सद्भाव का प्रत्युत्तर देना चाहते थे।

2000 में क्या हुआ था?

सम्राट चौधरी का इशारा वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव के बाद बने राजनीतिक हालात की ओर था। उस चुनाव में किसी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। तत्कालीन समता पार्टी के नेता नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन सरकार बहुमत जुटाने में सफल नहीं रही और करीब एक सप्ताह के भीतर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

लालू प्रसाद के मुख्यमंत्री बनने का भी जिक्र

सम्राट चौधरी ने इसी संदर्भ में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के 1990 में मुख्यमंत्री बनने का भी उल्लेख किया।

उन्होंने दावा किया कि लालू प्रसाद भी भाजपा के ‘आशीर्वाद’ से मुख्यमंत्री बने थे। साथ ही उन्होंने कहा कि उस समय दलित नेता रामसुंदर दास भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में थे और लालू प्रसाद ने उन्हें विधायक दल के चुनाव में मामूली अंतर से हराया था।

उपलब्ध ऐतिहासिक विवरण के अनुसार, 1990 में जनता दल की सरकार भाजपा के बाहरी समर्थन से बनी थी। हालांकि, इसे इस रूप में समझना जरूरी है कि लालू प्रसाद मुख्यमंत्री पद के लिए जनता दल के विधायक दल के चुनाव में चुने गए थे; भाजपा ने उन्हें सीधे मुख्यमंत्री नियुक्त नहीं किया था।

तेजस्वी के ‘चुने गए नेता’ वाले बयान पर जवाब

सम्राट चौधरी ने तेजस्वी यादव के उस तंज का भी जवाब दिया जिसमें उन्हें ‘चुना हुआ नहीं, चुना गया नेता’ कहा गया था।

बिना तेजस्वी का नाम लिए चौधरी ने कहा कि उन्हें याद रखना चाहिए कि उनकी मां राबड़ी देवी भी पहली बार मुख्यमंत्री बनने के समय जनता द्वारा निर्वाचित मुख्यमंत्री नहीं थीं। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय पहले से यह घोषणा नहीं की गई थी कि राबड़ी देवी मुख्यमंत्री बनेंगी।

‘मोदी और नीतीश के आशीर्वाद से मिला राजनीतिक कद’

सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि वह खुद को छोटा नेता मानते हैं और उनका राजनीतिक कद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा नीतीश कुमार के समर्थन से बढ़ा है।

उन्होंने बताया कि भाजपा ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया, वह दो बार उपमुख्यमंत्री रहे और पहली बार गृह विभाग की जिम्मेदारी भी उन्हें मिली। चौधरी ने कहा कि फिलहाल उनकी प्राथमिकताओं में कानून-व्यवस्था, शिक्षा और औद्योगीकरण के जरिए राजस्व बढ़ाना शामिल है।

पुराने राजनीतिक घटनाक्रम फिर चर्चा में

सम्राट चौधरी के बयान के बाद बिहार की राजनीति में 1990 और 2000 के पुराने राजनीतिक घटनाक्रम एक बार फिर चर्चा में हैं। उनके बयान में एक तरफ नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने को लेकर भाजपा का पक्ष सामने आया, वहीं दूसरी तरफ लालू प्रसाद के मुख्यमंत्री बनने के समय भाजपा के बाहरी समर्थन का उल्लेख किया गया।

हालांकि, इन घटनाओं की राजनीतिक व्याख्या को लेकर अलग-अलग दलों के अपने-अपने दावे हैं। इसलिए सम्राट चौधरी द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘आशीर्वाद’ जैसे शब्द को उनके राजनीतिक बयान के रूप में देखना उचित है, न कि उस समय की संवैधानिक प्रक्रिया का आधिकारिक विवरण।

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