पटना | 18 सितंबर 2026
बिहार की राजनीति में एक बार फिर जनता दल यूनाइटेड (JDU) के अध्यक्ष नीतीश कुमार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के बाद अब कांग्रेस की ओर से भी नीतीश कुमार को महागठबंधन के साथ आने का सार्वजनिक न्योता दिया गया है। लगातार सामने आ रहे इन बयानों ने बिहार के राजनीतिक समीकरणों और नीतीश कुमार की आगे की भूमिका को लेकर चर्चाओं को बढ़ा दिया है।
RJD ने दिया साथ आने का न्योता
RJD विधायक भाई वीरेंद्र ने 15 सितंबर को JDU और नीतीश कुमार से NDA से अलग होकर RJD के साथ सरकार बनाने की अपील की। उन्होंने समाजवादी दलों के एक साथ आने की बात कही और JDU को BJP से गठबंधन तोड़कर महागठबंधन के साथ आने का न्योता दिया।
17 सितंबर को RJD की ओर से दोबारा नीतीश कुमार को साथ आने का संदेश दिया गया। यानी कुछ ही दिनों के भीतर RJD की तरफ से यह राजनीतिक अपील दोहराई गई।
हालांकि, RJD के इस प्रस्ताव को नीतीश कुमार या JDU की ओर से स्वीकार किए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
कांग्रेस ने भी बढ़ाया हाथ
RJD के बाद कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने भी नीतीश कुमार को महागठबंधन में आने का न्योता दिया। कांग्रेस नेता ने कहा कि नीतीश कुमार की राजनीतिक पृष्ठभूमि समाजवादी विचारधारा से जुड़ी रही है और उन्हें महागठबंधन के साथ आना चाहिए।
कांग्रेस की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में JDU और BJP के बीच राजनीतिक रिश्तों को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं।
BJP के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला?
नीतीश कुमार की पार्टी JDU लंबे समय से बिहार और केंद्र की NDA राजनीति में एक महत्वपूर्ण सहयोगी रही है। ऐसे में विपक्ष की ओर से नीतीश कुमार को लगातार सार्वजनिक न्योता मिलना केवल बिहार तक सीमित राजनीतिक घटनाक्रम नहीं माना जा रहा।
अगर भविष्य में JDU और BJP के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ती है, तो इसका असर बिहार के साथ-साथ केंद्र की गठबंधन राजनीति पर भी पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल JDU की ओर से NDA छोड़ने का कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।
इसलिए अभी RJD और कांग्रेस के बयानों को राजनीतिक प्रस्ताव के तौर पर देखना ज्यादा उचित है, न कि किसी गठबंधन परिवर्तन की पुष्टि के तौर पर।
नीतीश कुमार की भूमिका पर नजर
नीतीश कुमार लंबे समय से बिहार की राजनीति के प्रमुख चेहरों में रहे हैं और JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में पार्टी की भविष्य की दिशा को लेकर उनके रुख को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
18 सितंबर को JDU के सांसदों और विधायकों के लिए पार्टी का एक कार्यक्रम भी हुआ, जिसमें नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार के साथ पहली बार पार्टी के आधिकारिक मंच पर नजर आए। इस घटनाक्रम ने JDU के भविष्य और नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं को भी नया संदर्भ दिया।
हालांकि, निशांत कुमार की राजनीतिक भूमिका को लेकर अभी कई बातें अटकलों के स्तर पर हैं और इसे किसी निश्चित राजनीतिक फैसले के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।
बिहार से दिल्ली तक क्यों बढ़ी चर्चा?
नीतीश कुमार को लेकर मौजूदा घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिहार की राजनीति में गठबंधन बदलने का उनका पुराना राजनीतिक रिकॉर्ड रहा है। ऐसे में जब RJD और कांग्रेस दोनों की ओर से सार्वजनिक रूप से साथ आने का न्योता दिया गया है, तो राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज होना स्वाभाविक है।
लेकिन मौजूदा स्थिति में तीन बातें स्पष्ट हैं—
- RJD ने JDU को NDA से अलग होकर साथ आने का न्योता दिया है।
- कांग्रेस ने भी नीतीश कुमार को महागठबंधन में आने की अपील की है।
- JDU ने NDA छोड़ने या विपक्ष के साथ जाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
इसलिए फिलहाल बिहार की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल किसी तत्काल गठबंधन परिवर्तन का नहीं, बल्कि नीतीश कुमार और JDU की आगे की राजनीतिक दिशा का है।
आने वाले दिनों में JDU की बैठकों, नीतीश कुमार के बयानों और BJP के साथ पार्टी के संबंधों पर नजर रहेगी। इसी से स्पष्ट होगा कि विपक्ष का यह न्योता केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है या बिहार के राजनीतिक समीकरणों में कोई वास्तविक बदलाव आता है।
