BRICS Summit 2026: दिल्ली में जुटेंगे दुनिया के बड़े उभरते देश, चीन-रूस समेत 11 सदस्य; जानिए कौन आ रहा, कौन नहीं



भारत में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाला यह सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है, जब पश्चिम एशिया में संघर्ष, वैश्विक व्यापार में बढ़ता तनाव और अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित किया है। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और सम्मेलन की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखी गई है।

सम्मेलन से पहले विदेशी मेहमानों का दिल्ली पहुंचना शुरू हो गया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई प्रमुख नेता और वरिष्ठ प्रतिनिधि राजधानी पहुंच चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस भी दिल्ली पहुंच चुके हैं।

BRICS क्या है और इसकी शुरुआत कैसे हुई?

BRICS आज दुनिया के प्रमुख उभरते देशों का एक महत्वपूर्ण मंच है, लेकिन इसकी शुरुआत किसी औपचारिक संगठन के रूप में नहीं हुई थी।

साल 2001 में Goldman Sachs के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने “BRIC” शब्द का इस्तेमाल ब्राजील, रूस, भारत और चीन की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के संदर्भ में किया था। इसके बाद इन देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक सहयोग बढ़ा।

2006 में BRIC देशों ने औपचारिक राजनीतिक संवाद शुरू किया और 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला BRIC शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका समूह में शामिल हुआ और 2011 से इसका नाम BRICS हो गया।

2024 में समूह का बड़ा विस्तार हुआ। मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात नए सदस्य बने। इसके बाद इंडोनेशिया जनवरी 2025 में पूर्ण सदस्य बना।

आज BRICS में कुल 11 सदस्य हैं ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इंडोनेशिया।

इन 11 देशों की संयुक्त हिस्सेदारी वैश्विक आबादी में करीब 49.5 प्रतिशत, वैश्विक GDP में लगभग 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार में करीब 26 प्रतिशत बताई गई है।

भारत की अध्यक्षता में क्या है मुख्य एजेंडा?

भारत की अध्यक्षता का फोकस केवल राजनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं है। इस साल BRICS के तहत 350 से अधिक बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम 25 से ज्यादा शहरों में आयोजित किए गए हैं।

मुख्य एजेंडे में वैश्विक शासन में सुधार, व्यापार और निवेश, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक, डिजिटल अर्थव्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला, आपदा प्रबंधन और सतत विकास जैसे मुद्दे शामिल हैं।

भारत BRICS देशों के बीच सीमा-पार डिजिटल भुगतान को आसान बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। सदस्य देशों की Central Bank Digital Currencies यानी CBDC को जोड़ने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। हालांकि वित्तीय प्रणालियों के बीच अंतर और सदस्य देशों के राजनीतिक मतभेद इस पहल के सामने चुनौती बने हुए हैं।

इसके अलावा BRICS Startup Innovation Fund, BRICS Incubator Network और Logistics-Supply Chain Cooperation Framework जैसी पहलों पर भी चर्चा हो रही है।

कौन-कौन दिल्ली पहुंच चुके हैं?

BRICS Summit से पहले विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के दिल्ली पहुंचने का सिलसिला जारी है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 11 सितंबर को दिल्ली पहुंच चुके हैं। उनकी यात्रा भारत-रूस संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। BRICS बैठक के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच द्विपक्षीय बातचीत में ऊर्जा, व्यापार और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों पर चर्चा हो सकती है।

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा भी दिल्ली पहुंच चुके हैं। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की मौजूदगी पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच विशेष महत्व रखती है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस भी दिल्ली पहुंच चुके हैं। बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और वैश्विक शासन से जुड़े मुद्दों पर उनकी भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इसके अलावा युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो, नाइजीरिया की विदेश मंत्री बियांका ओडुमेग्वु-ओजुक्वु, उरुग्वे के विदेश मंत्री माउरो लुबेत्किन और फिलीपींस की विदेश सचिव मारिया थेरेसा पी. लाजारो समेत कई वरिष्ठ प्रतिनिधि भी दिल्ली पहुंच चुके हैं।

स्वास्थ्य और बहुपक्षीय सहयोग से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधियों में WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडहानोम घेब्रेयेसस और एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक के अध्यक्ष झोउ जियायी भी शामिल हैं।

शी जिनपिंग समेत कई बड़े नेता अभी पहुंचेंगे

सम्मेलन में सबसे ज्यादा नजर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा पर है। करीब सात साल बाद उनकी भारत यात्रा हो रही है। उनके 12 सितंबर को दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक भी होगी। इसमें व्यापार, सीमा और भारत-चीन संबंधों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।

इसके अलावा मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम समेत अन्य प्रमुख नेता भी सम्मेलन में शामिल होंगे।

संयुक्त अरब अमीरात की ओर से राष्ट्रपति के बजाय अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। वहीं सऊदी अरब की ओर से विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान भाग लेंगे।

ब्राजील के राष्ट्रपति क्यों नहीं आ रहे?

BRICS के संस्थापक सदस्यों में शामिल ब्राजील सम्मेलन में मौजूद रहेगा, लेकिन राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा दिल्ली नहीं आ रहे हैं।

ब्राजील का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री माउरो विएरा कर रहे हैं। लूला इससे पहले फरवरी 2026 में भारत में आयोजित AI Summit में शामिल हो चुके हैं।

ब्राजील की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह BRICS के मूल चार देशों में शामिल रहा है और Global South की राजनीति में उसका प्रभाव लगातार बना हुआ है।

BRICS के Partner Countries कौन हैं?

BRICS ने पूर्ण सदस्यता के अलावा Partner Country की व्यवस्था भी शुरू की है। यह व्यवस्था 2024 के कजान शिखर सम्मेलन में बनाई गई थी।

वर्तमान में 10 Partner Countries हैं बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाखस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम।

इन देशों को पूर्ण सदस्य देशों से अलग दर्जा प्राप्त है। हालांकि वे BRICS की कुछ बैठकों और कार्यक्रमों में निर्धारित प्रारूप के तहत हिस्सा ले सकते हैं।

बांग्लादेश इस बार क्यों नहीं आ रहा?

BRICS Summit से पहले बांग्लादेश की भागीदारी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हुई है।

बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में BRICS Summit के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था। उनके अनुसार निमंत्रण उन्हें BIMSTEC के अध्यक्ष के रूप में दिया गया था।

इसके बाद बांग्लादेश ने BRICS Summit में प्रतिनिधि भेजने से इनकार कर दिया। हालांकि भविष्य में प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा की संभावना बनी हुई है।

BRICS के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

दिल्ली सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब BRICS के भीतर भी कई मुद्दों पर मतभेद हैं। सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम एशिया का संघर्ष है। ईरान और UAE दोनों BRICS के सदस्य हैं, लेकिन क्षेत्रीय तनाव ने समूह के भीतर साझा रुख बनाना मुश्किल किया है।

मई में नई दिल्ली में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक भी संयुक्त बयान के बिना समाप्त हुई थी। ऐसे में अब नजर इस बात पर होगी कि 11 सदस्य देश पश्चिम एशिया संकट और अन्य वैश्विक मुद्दों पर साझा भाषा और संयुक्त घोषणा पर सहमत हो पाते हैं या नहीं।

भारत के लिए भी यह सम्मेलन बड़ी कूटनीतिक परीक्षा है। एक तरफ उसे रूस और चीन जैसे प्रमुख BRICS सदस्यों के साथ संबंधों को आगे बढ़ाना है, तो दूसरी तरफ अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों का संतुलन भी बनाए रखना है।

12 और 13 सितंबर का BRICS Summit इसलिए सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय बैठक नहीं है। यह भारत की कूटनीतिक क्षमता, Global South में उसकी भूमिका और तेजी से बदलती वैश्विक व्यवस्था में BRICS की वास्तविक प्रभावशीलता की भी परीक्षा होगी।

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