Delhi Protest:- जंतर-मंतर प्रदर्शन पर बड़ा फैसला, प्रदर्शन स्थल की सूची से बाहर, CJP ने दिल्ली पुलिस को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम



नई दिल्ली,

नई दिल्ली: दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों को लेकर सोमवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है। इसके स्थान पर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को प्रदर्शन स्थलों के रूप में निर्धारित किया गया है। इस फैसले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की तारीख और समय तय करने के लिए दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से क्यों हटाया गया?

दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित समिति ने प्रदर्शन और धरना आयोजित करने के लिए वैकल्पिक स्थानों की समीक्षा की थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का फैसला लिया गया।

यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब राजधानी में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध-प्रदर्शन जारी हैं।

CJP ने पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया

CJP के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका 12 अक्टूबर को संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे। उन्होंने पुलिस से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तारीख और समय निर्धारित करने की मांग की।

पार्टी ने कहा कि पुलिस को 24 घंटे के भीतर जवाब देना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर संगठन ने नए प्रदर्शन का आह्वान करने की चेतावनी दी है। CJP ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं।
प्रदर्शनकारियों की हिरासत और पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल

10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आई थीं। प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई तथा शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर सवाल उठाए हैं।

दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की चिंताओं के बीच प्रतिबंध लगाए गए। ऐसे में इस पूरे विवाद का एक अहम पहलू यह है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के साथ नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा कैसे की जाए।

क्या सरकार असहमति की आवाजों से असहज है?

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि विरोध दर्ज कराने के लिए उपलब्ध स्थानों और प्रक्रियाओं पर इसका क्या असर पड़ेगा। 

लेकिन लोकतंत्र में सरकार और प्रशासन की जवाबदेही महत्वपूर्ण है। यदि नागरिक शांतिपूर्ण तरीके से सवाल पूछना चाहते हैं, तो उन्हें स्पष्ट नियमों के तहत विरोध का अवसर मिलना चाहिए। प्रशासन को भी यह स्पष्ट करना होगा कि नई व्यवस्था के तहत प्रदर्शन की अनुमति कैसे मिलेगी।

अब आगे क्या होगा?

CJP के 24 घंटे के अल्टीमेटम के बाद दिल्ली पुलिस का जवाब महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा, जंतर-मंतर और वैकल्पिक प्रदर्शन स्थलों को लेकर कानूनी प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर को संबंधित याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार करते हुए मामले को 13 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध किया था।

लोकतंत्र में असहमति को जगह देना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना दोनों प्रशासन की जिम्मेदारियां हैं। जंतर-मंतर विवाद अब इसी संतुलन की परीक्षा बन गया है।

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